कल..... मायावती सरकार ने उप्र में कछा एक से अंग्रेजी की पढाई चालू करके, सरकारी स्कूलों में कुछ नई जान फूकने का काम जरूर किया है लेकिन उन्हें स्कूलों की जमीनी हालत भी देखने होंगे जैसे टीचरों की संख्या, टीचरों की उपस्थिति ,स्कूल के पास मौजूद रिसोर्सेस वैसे आप लोगों को पता ही होगा की सरकारी स्कूलों की हालत के बारे में जनता में क्या राय बन चुकी है पहले लोगों के अन्दर से ये भावना निकालने की जरूरत है कि सरकारी स्कूलों में तो बच्चे अच्छे नम्बर ला ही नही सकतेइसके मायावती ही नही केन्द्र सरकार को भी अच्छे टीचर जुटाने के लिए भर्ती प्रकिया को पारदर्शी बनाना पड़ेगा क्यों आपका क्या कहना है ..... प्लीज़ बताये
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