कैसे गिरते है बाल ....

Dec 31, 2008

पहले आपको ये बता दें कि एक सामान्य व्यक्ति की खोपड़ी में कोई एक लाख रोमकूप होते हैं और हरएक रोमकूप से उसके जीवन काल में कोई 20 बाल निकल सकते हैं. हर बाल एक महीने में कोई एक सेंटीमीटर बढ़ता है. एक वक़्त में सिर के 90 प्रतिशत बाल बढ़ रहे होते हैं जबकि 10 प्रतिशत आराम कर रहे होते हैं. आराम कर रहे बाल दो या तीन महीने के अंदर गिर जाते हैं. इस तरह हर रोज़ हमारे कोई 100 बाल गिर जाते हैं. यानी 100 बालों का गिरना सामान्य है. लेकिन अगर इससे अधिक बाल गिरते हैं तो चिंता होना लाज़मी है. इसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे लंबी बीमारी या शल्य चिकित्सा के बाद अधिक बाल गिर सकते हैं. अगर आप अधिक तनाव की स्थिति में हैं तब भी बाल गिरते हैं. अगर आपकी थाइरॉइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर रही तो उसका असर भी पड़ सकता है. बच्चा पैदा होने के बाद भी कई महिलाओं के बाल गिरने लगते हैं क्योंकि उनके शरीर में हारमोंस का संतुलन बिगड़ जाता है. कई दवाओं के प्रयोग से बाल गिरने लगते हैं जैसे ख़ून को पतला करने वाली दवा, कैंसर के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाएं, गर्भनिरोधक दवाएं या ऐंटी डिप्रैसैंट. कई बार फ़ंगस इन्फ़ैक्शन से भी बाल गिरने लगते हैं.
*स्त्रोत B.B.C.

सात फेरे सात कश्मे

Dec 30, 2008

हिंदू विवाह संस्कार के अंतर्गत वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं और इसी प्रक्रिया में दोनों सात फेरे लेते हैं, जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है। और यह सातों फेरे या पद सात वचन के साथ लिए जाते हैं. जिसमें पहला वचन होता है, पति-पत्नी को जीवन भर पर्याप्त और सम्मानित ढंग से भोजन मिलता रहे, दूसरा दोनों का जीवन शांतिपूर्ण और स्वस्थ ढंग से बीते, तीसरा दोनों अपने जीवन में आध्यात्मिक और धार्मिक दायित्वों को निभा सकें, चौथा फेरा इस वचन के साथ लिया जाता है कि दोनों सौहार्द्र और परस्पर प्रेम के साथ जीवन बितायें, पाँचवे फेरे का वचन होता है विश्व का कल्याण हो और संतान कि प्राप्ति हो, छठे में प्रार्थना की जाती है कि सभी ऋतुएं अपने अपने ढंग से समुचित धनधान्य उत्पन्न करके दुनिया भर को सुख दें क्योंकि सभी के सुख में दंपत्ति का भी भला होता है और सातवें फेरे में पति-पत्नी परस्पर विश्वास, एकता, मतैक्य और शांति के साथ जीवन बिता सकें. इन सात फेरों के साथ लिए वचनों में अपने और विश्व की शांति और सुख की प्रार्थना की जाती है.

*स्त्रोत B.B.C.

नव वर्ष मंगलमय हो .....

दोस्तों २००८ विदाई लेने को तैयार है ! २००९ इंतजार में खड़ा है ! तो आईये कुछ ऐसे सूत्रों की चर्चा की जाए तथा उन्हें निभाने की भी कोसिस की जाए ,जिनसे हमारा आने वाला साल तथा जिंदगी को सफल तथा सार्थक बनाने में कुछ मदद मिले :१. रिलेशनशिप कभी ख़त्म नही होती है ! उनके रूप जरूर बदल जाते है !२. लोग उन्ही के साथ काम करना चाहते है ,जिनके साथ उनके पहले से ही सम्बन्ध होते है ! इसलिए नेटवर्किंग बहुत जरूरी है ! लोगों से मिलते-जुलते रहिये ~३. डर और आलस सफलता के सबसे बड़े दुश्मन है !४. ये हमेशा याद रखो कि,'भगवान मुझसे प्यार करते है '५.तनाव उन्हें रहता है, जिन्हें थोडी सी भी फुरशत रहती है, बिजी रहना तनाव भगाने का सर्वोत्तम तरीका है !वैसे भी छोटी-मोटी बातों कि परबाह नही करनी चाहिए !६. पैसा कितना भी हो पूरा खर्च नही करना चाहिए ,क्योंकि अगर आप पैसे को बचायेगे तो पैसा आपको बचायेगा ~७.याद रखिये कि ईश्वर तुम्हे हर समय सुन रहा है, इसलिए ख़ुद से बातें करते समय ईमानदार रहिये !८. हर चीज को बहुत गंभीर तरीके नही लेना चाहिए !थोडी बहुत मजाक की समझ भी विकिसित करे !९. हमारी हर गलती के लिए म्रत्युदंड नही मिलता! लेकिन अगर हम उनसे यदि सबक ना ले तो दोहरा जरूर सकते है !१०.हमे दूसरों को यह सिखाना जरूरी है कि वे हमारे साथ कैसा व्यवहार करे ! अपने स्व का अहसास इतना रखे कि वह स्वार्थी ना हो, लेकिन अपनी गरिमा बनी रही !!
इसी के साथ आप सभी को नववर्ष ही हार्दिक शुभकामनाये !!

नोयडा .....

Dec 28, 2008


नोएडा का पूरा नाम है न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी. इसकी स्थापना 19 अप्रैल 1976 को संजय गांधी ने की थी. पहले यह बुलंदशहर ज़िले में पड़ता था. फिर उसे ग़ाज़ियाबाद में शामिल किया गया. जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने उसे अलग ज़िला घोषित कर दिया. फिर मुलायम सिंह सरकार ने उसे ग़ाज़ियाबाद में शामिल कर दिया. लेकिन अब वह गौतम बुद्ध नगर नाम से अलग ज़िला है. नोएडा में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय हैं, शॉपिंग मॉल हैं, कार बनाने वाली कई कंपनियों की इकाइयाँ हैं, फ़िल्म सिटी है, प्रमुख समाचार टेलीविज़न चैनलों के कार्यालय हैं, कई बड़े अस्पताल हैं, उच्च शैक्षणिक संस्थाएं हैं और बहुत कुछ है.

आज बात "याहू" महाराज की

Dec 25, 2008

याहू डॉटकॉम की स्थापना अमरीका के स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे दो छात्रों, डेविड फ़िलो और जैरी यांग ने 1994 में की थी. यह वेबसाइट जैरी ऐन्ड डेविड्स गाइड टू द वर्ल्ड-वाइड-वैब के नाम से शुरु हुई थी लेकिन फिर उसे एक नया नाम मिला, यट अनदर हाइरार्किकल ऑफ़िशियस ओरैकिल. जिसका संक्षिप्त रूप बनता है याहू. जैरी और डेविड ने इसकी शुरुआत इंटरनेट पर अपनी व्यक्तिगत रुचियों के लिंकों की एक गाइड के रूप में की थी लेकिन फिर वह बढ़ती चली गई. फिर उन्होंने उसे श्रेणीबद्ध करना शुरु किया. जब वह भी बहुत लम्बी हो गई तो उसकी उप-श्रेणियां बनाईं. कुछ ही समय में उनके विश्वविद्यालय के बाहर भी लोग इस वेबसाइट का प्रयोग करने लगे. अप्रैल 1995 में सैकोया कैपिटल कम्पनी की माली मदद से याहू को एक कम्पनी के रूप में शुरू किया गया. इसका मुख्यालय कैलिफ़ोर्निया में है और यूरोप, एशिया, लातीनी अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमरीका में इसके कार्यालय हैं.

लालू जी की "घड़ी".....

Dec 24, 2008


रावरी देवी मर जाती हैं, और स्वर्ग में यमराज के पास पहुचती है।वहाँ देखती हैं एक दीवाल पर ढेर सारी घडियाँ टंगी हैं.

राबरी (यमराज से) :इस दीवाल पर इतनी सारी घडियाँ क्यों है?

यमराज : ये झूठी घडियाँ हैं,जो धरती पर झूठ बोलता हैं,ये सब उसके उसके नाम की घडियाँ हैं।जब भी कोई एक झूठ बोलता हैं,तो उसके नाम की घड़ी एक पॉइंट आगे बढ़ जाती है.

राबडी: (एक घड़ी की तरफ़ इशारा करके) ये वाली घड़ी किसकी है?यमराज: ये घड़ी गौतम बुध की हैं,उसने कभी एक भी झूठ नही बोला,इसलिए इस घड़ी का एक भी पॉइंट आगे नही बढ़ा है।

राबडी :(दूसरी घड़ी की तरफ़ इशारा करके) और ये वाली घड़ी किस की हैं?

यमराज : ये वाली घड़ी गांधी जी की हैं,उसने सिर्फ़ दो बार झूठ बोला था,इसलिए इस घड़ी का पॉइंट सिर्फ़ दो बार आगे बढ़ा है।

राबडी (आश्चर्य से यमराज से पूछती हैं) : अच्छा ,हमारे पति श्री लालू जी की कौन सी घड़ी है?यमराज:उनकी घड़ी मेरे ऑफिस में लगी हैं ,जो सीलिंग फैन का काम कर रही हैं.

कहानी "गूगल" महाराज की


गूगल सर्च इंजन को अंग्रेज़ी में लिखा जाता है google लेकिन असल में यह googol की ग़लत स्पैलिंग है. गूगल एक बहुत बड़ी संख्या है जिसमें 1 के आगे 100 शून्य लगते हैं. सन 1920 में अमरीका के एक गणितज्ञ ऐडवर्ड कैसनर, इस संख्या के लिए नाम तलाश कर रहे थे और जब उनके नौ वर्षीय भांजे मिल्टन ने गूगल नाम सुझाया तो उन्होंने उसे दर्ज करा लिया. कैसनर ने एक अन्य गणितज्ञ के साथ मिलकर एक किताब लिखी 'मैथमैटिक्स ऐंड द इमैजिनेशन' जिसमें पहली बार इस शब्द का ज़िक्र हुआ. लेकिन सर्च इंजन का नाम गूगल कैसे पडा इसकी अलग कहानी है. जनवरी 1996 में अमरीका के स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय में लैरी पेज ने एक शोध शुरू किया. कुछ समय बाद सर्गी ब्रिन भी उनके साथ हो लिए. लैरी की परिकल्पना यह थी कि अगर एक ऐसा सर्च इंजन बनाया जाए जो विभिन्न वैबसाइटों के आपसी संबंध का विश्लेषण कर सके तो बेहतर परिणाम मिल सकेंगे. उन्होंने पहले इसका नाम रखा था बैकरब. लेकिन क्योंकि लैरी की गणित में बहुत रुचि थी इसलिए उन्होंने इस सर्च इंजन का नाम गूगल रख दिया.
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