Nov 8, 2008

गंगाजल को देव जल कहा जाता है त्रिदेवों का स्पर्श होने से उसकी एक बूँद ही पवित्र कर देती है गंगाजल कभी अपवित्र नही होता,और न ही कभी ख़राब होता हैऐसा सनातन धर्मं के अनुयायियों की मान्यता हैलेकिन इस पक्ष में वैज्ञानिको के शोध क्या कहते है, इस बारे में कुछ प्रकाश डालते है
वैज्ञानिक शोध में पाया गया है, किगंगा में पाए गए जीवाणु इसके जल को शुद्ध रखते है वे नुकसानदायक जीवाणु को भी खत्म करते है गंगाजल में लौह तत्व की मात्रा भी अन्य नदियों की अपेक्षा ज्यादा पाई गई है

आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों ने गंगा जी के किनारे से मिट्टी तथा रेत के सैम्पल लेकर कोर लैब में परिक्षण कराने पर ५ प्रकार के जीवणुओ को पायाजोकि गंगा के लिए फायेदेमंद हैपाइप के सहारे ५० फ़ुट नीचे से मिट्टी (कोर) तथा रेत के सेम्पलों का ल्युमनेसिंग डिस्टिग्स तकनीकी से टेस्ट करने पर, तापमान,मग्नेटिक,और मल्टीप्रोक्सी अप्रोच का परिक्षण करके पाया गया कि गंगा लगभग ३० हजार बर्षों से अविरल बह रही है तथा भविष्य कि आयु कि गणना के बारे शोध कार्य चल रहे है

हाँ अंत में एक बात और बताता चलूँ कि यू एन क्लामेट रिपोर्ट के अनुसार,३० बर्षों में गंगा के पानी में प्रदुषण कि मात्रा २८ फीसदी तक बढ जायेगी और गंगोत्री ग्लेशियर लगभग सन् २०३० इसबी में लुप्त प्रायहो जायेगा, और गंगा मानसून पर निर्भर हो जायेगी अतः अब हमे जल्दी ही जागना होगा

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