सुरक्षा में सूराख

Nov 28, 2008


आर्थिक राजधानी मुम्बई पर एक बार फिर से सुनियोजित तरीके से आतंकबादी हमले से साफ हो गया है कि हमारी आंतरिक सुरक्षा ठीक नही है आतंकबाद से निपटने कि हमारी नीति बिल्कुल ढुलमुल है देश में शख्त कानून का अभाव है पुलिस व्यवस्था जर्जर हो चुकी है, इसका राजनीतिकरण हो चुका है ये सब परिस्थितियों के बाबजूद सरकार आँखें मूंदे हुए है आज यहाँ एक अजीब सा माहौल है अरे इनकी निडरता तो देखिये सरेआम विस्फोट करके , फायरिंग भी कर रहे है क्योंकि उन्हें पता है , कि पकडे जाने पर भी उनका कुछ नही होगा कोई न कोई "अमरसिंह" या "मानवाधिकार संस्था " मिल ही जायेगी यही वजह है कि आतंकवादी भारत को सॉफ्ट कार्नर मानते है इस सब के लिए हमारे नेता ही जिम्मेदार है हम लोग पश्चिमी देशो की चव्वनीछाप चीजो की नक़ल करने में तो बहुत आगे रहते है लेकिन उनके यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था की नक़ल कभी नही की क्यों वहां ७ जुलाई के बाद दूसरा हमला नही हुआ ?...........

2 comments:

Anonymous said...

i agree with u

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

" शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं........बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।"

समीर जी की इस टिपण्णी में मेरा सुर भी शामिल!!!!!!!
प्राइमरी का मास्टर